म्यूचुअल फ़ंड विश्वास है. यह समान विचारों वाले शेयरधारकों से धन एकत्रित करता है और निवेशकों की विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रतिभूतियों के विविधतापूर्ण पोर्टफ़ोलियो में निवेश करता है. इस प्रकार एकत्रित धन एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) द्वारा विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है. विशेष योजना के निवेश उद्देश्य के आधार पर इसमें शेयर, ऋणपत्र, परिवर्तनीय, बॉण्ड्स, मुद्रा बाज़ार उपकरण या अन्य प्रतिभूतियाँ शामिल हो सकती हैं. उस योजना के लिए ऐसे उद्देश्य प्रस्ताव दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से वर्णित हैं. फ़ंड मूल्य को निवेश में दो तरह से जोड़ता है: अर्जित आय और विक्रय द्वारा कोई भी पूँजीगत वृद्धि. इकाइयों की संख्या के अनुपात में इसे इकाई धारकों द्वारा साझा किया जाता है.
एसेट मैनेजमेंट कंपनी क्या है?
एएमसी दैनिक प्रबंधन में शामिल होती है और फ़ंड के लिए निवेश परामर्शक के रूप में भी कार्य करती है. एसेट मैनेजमेंट कंपनी का किसी प्रायोजक द्वारा प्रचार-प्रसार किया जाता है जो आमतौर पर कोई प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट निकाय होता है जिसका लाभ का बेहतर रिकॉर्ड हो. आमतौर पर एएमसी के तीन विभाग होते हैं:
फ़ंड प्रबंधन
विक्रय और विपणन
परिचालन और लेखांकन
विभिन्न प्रकार की म्यूचुअल फ़ंड योजनाएँ क्या हैं?
म्यूचुअल फ़ंड योजनाएँ निम्न प्रकार से वर्गीकृत की जा सकती हैं:
संरचना के आधार पर
असीमित अवधि वाली योजनाएँ
सीमित अवधि वाली योजनाएँ
अंतराल योजनाएँ
निवेश उद्देश्य के आधार पर
वृद्धि योजनाएँ
आय योजनाएँ
शेष योजनाएँ
मुद्रा बाज़ार योजनाएँ
अन्य प्रकार की योजनाएँ
कर बचत योजनाएँ
विशेष योजनाएँ
सूचकांक योजनाएँ
क्षेत्र विशिष्ट योजनाएँ
संरचना के आधार पर
असीमित अवधि वाले फ़ंड
सीमित अवधि वाले फ़ंड में निर्दिष्ट परिपक्वता अवधि होती है जिसकी सीमा 3 से 15 वर्ष होती है. फ़ंड निर्दिष्ट अवधि के दौरान ही ग्राहकी के लिए खुला होता है. प्रारंभिक सार्वजनिक ईश्यू के समय निवेशक योजना में निवेश कर सकते हैं और उसके बाद वे सूचीबद्ध स्टॉक एक्सचेंज पर योजना की इकाइयाँ ख़रीद या बेच सकते हैं.
सीमित अवधि वाले फ़ंड
सीमित अवधि वाले फ़ंड में निर्दिष्ट परिपक्वता अवधि होती है जिसकी सीमा 3 से 15 वर्ष होती है. फ़ंड निर्दिष्ट अवधि के दौरान ही ग्राहकी के लिए खुला होता है. प्रारंभिक सार्वजनिक ईश्यू के समय निवेशक योजना में निवेश कर सकते हैं और उसके बाद वे सूचीबद्ध स्टॉक एक्सचेंज पर योजना की इकाइयाँ ख़रीद या बेच सकते हैं.
निवेश उद्देश्य के आधार पर
वृद्धि फ़ंड
वृद्धि फ़ंड का लक्ष्य मध्यम से दीर्घावधि तक पूँजीगत वृद्धि उपलब्ध कराना है. आमतौर पर ऐसी योजनाएँ उनके संग्रहण का बड़ा भाग इक्विटीज़ में निवेश करती हैं. वृद्धि योजनाएँ उन निवेशकों के लिए आदर्श होती हैं जिनका दीर्घकालिक दृष्टिकोण होता है और जो किसी समयावधि में वृद्धि तलाश रहे हैं.
आय फ़ंड
आय फ़ंड का लक्ष्य निवेशकों को निरंतर और स्थिर आय उपलब्ध कराना है. सामान्यत: ऐसी योजनाएँ निश्चित आय प्रतिभूतियों जैसे बॉण्ड्स, कॉर्पोरेट ऋणपत्र और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करती हैं. आय फ़ंड पूँजी स्थिरता और नियमित आय के लिए आदर्श होते हैं.
संतुलित फ़ंड
संतुलित फ़ंड का लक्ष्य वृद्धि और नियमित आय उपलब्ध कराना है. ऐसी योजनाएँ समय-समय पर उनकी आय वितरित करती हैं और उनके प्रस्ताव दस्तावेज़ों में वर्णित अनुपात में इक्विटीज़ और निश्चित आय प्रतिभूतियों दोनों में निवेश करती हैं. ये उन निवेशकों के लिए आदर्श हैं जो आय और संयत वृद्धि दोनों चाहते हों
मुद्रा बाज़ार फ़ंड
मुद्रा बाज़ार फ़ंड का लक्ष्य आसान तरलता, पूँजी का संरक्षण और संयत आय उपलब्ध कराना है. ये योजनाएँ आमतौर पर सुरक्षित अल्पावधि उपकरणों जैसे राजकोष बिल, जमा प्रमाणपत्र, वाणिज्यिक पत्र और इंटर-बैंक कॉल मनी में निवेश करती हैं. इन योजनाओं पर रिटर्न बाज़ार की वर्तमान ब्याज दरों के आधार पर परिवर्तित हो सकता है. ये अल्पावधियों के लिए अधिशेष फ़ंड रखने हेतु कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत निवेशकों के लिए श्रेष्ठ हैं.
अन्य योजनाएँ
कर बचत योजनाएँ
सरकार द्वारा निर्दिष्ट स्थानों में निवेश के लिए कर प्रोत्साहन का प्रस्ताव देने के कारण ये योजनाएँ भारतीय आय कर नियमों के तहत निवेशकों को कर में छूट देती हैं. इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम्स (ईएलएसएस) और पेंशन योजनाओं में किए गए निवेश में भारतीय आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 88 के तहत छूट दी जाती है.
सूचकांक योजनाएँ
सूचकांक फ़ंड किसी विशेष सूचकांक जैसे बीएसई सेंसेक्स या एनएसईएस और P CNX 50 के प्रदर्शन को दोहराने का प्रयास करते हैं.
क्षेत्रीय योजनाएँ
क्षेत्रीय फ़ंड वे हैं जो निर्दिष्ट क्षेत्र या क्षेत्रों जैसे एफ़एमसीजी, इन्फ़ोटेक, फ़ार्मास्युटिकल, इत्यादि में पृथक रूप से निवेश करते हैं. पोर्टफ़ोलियो के कम विविधतापूर्ण अर्थात् क्षेत्र या क्षेत्रों / उद्योग या उद्योगों के प्रति प्रतिबंधित होने के कारण इन योजनाओं में सामान्य इक्विटी योजनाओं की तुलना में अधिक जोख़िम होता है.
असीमित अवधि वाली और सीमित अवधि वाली योजना के बीच क्या अंतर है?
असीमित अवधि वाले फ़ंड इकाइयाँ जारी कर सकते हैं और योजना के दौरान किसी भी समय इकाइयों का मोचन कर सकते हैं. सीमित अवधि वाले फ़ंड बोनस या अधिकार निर्गम के अलावा नई इकाइयाँ जारी नहीं कर सकते. इस प्रकार, असीमित अवधि वाले फ़ंड की इकाई पूँजी प्रतिदिन परिवर्तित हो सकती है. इसके अलावा, असीमित अवधि वाले फ़ंड के नए निवेशक उपयुक्त निवल परिसंपत्ति मूल्य-संबंधित मूल्यों पर म्यूचुअल फ़ंड में सीधे ही आवेदन करके योजना में शामिल हो सकते हैं. सीमित अवधि वाली योजनाओं की स्थिति में, नए निवेशक केवल अनुषंगी बाज़ार से इकाइयाँ ख़रीद सकते हैं.
विवरणिका या प्रस्ताव दस्तावेज़ क्या है?
यह असीमित अवधि वाला फ़ंड, या नया जारी सीमित अवधि वाला फ़ंड दस्तावेज़ है जो निवेशकों को प्रदान करने के लिए आवश्यक होता है. फ़ंड में बताया गया है कि धन निवेश करने या भेजने के पूर्व निवेशकों को इसे ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए. विवरणिका में निम्न बातों का विवरण होना चाहिए:
शुल्क, मानकीकृत स्वरूप में
निवेश के उद्देश्य
कुछ वित्तीय डेटा
निवेश पद्धतियाँ
जोख़िम के घटक और विवरण
निवेश प्रबंधन और क्षतिपूर्ति
लाभांश और पूँजीगत लाभ वितरण
अन्य सेवाएँ
निवल परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) क्या है?
निवल परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) फ़ंड के तहत आने वाली प्रतिभूतियों का बाज़ार मूल्य है. इसकी गणना कारोबारी दिन के अंत में की जाती है. उस दिन प्राप्त किसी भी असीमित अवधि वाले फ़ंड की ख़रीद या विक्रय के ऑर्डर का सौदा उस दिन के अंत में परिकलित निवल परिसंपत्ति मूल्य के आधार पर किया जाता है. निवल परिसंपत्ति मूल्य प्रति इकाई बकाया इकाइयों की संख्या से विभाजित निवल परिसंपत्ति मूल्य होता है:
म्यूचुअल फ़ंड अपनी प्रतिभूतियों से लाभांश या ब्याज आय प्राप्त कर सकता है; इस आय को अपने निवेशकों में वितरित करना आवश्यक है. अधिकांश असीमित आय वाले फ़ंड लाभांश के साथ अतिरिक्त शेयर ख़रीदने के विकल्प देते हैं. लाभांश मासिक या तिमाही रूप से बनाए जाते हैं, हालाँकि कई फ़ंड वार्षिक रूप से वितरण करते हैं.
क्या म्यूचुअल फ़ंड इकाइयों में निवेश सुरक्षित है?
निवेशों से संबंधित किसी भी शेयर बाज़ार को पक्के तौर पर सुरक्षित नहीं कहा जा सकता; वे स्वाभाविक रूप से जोख़िम भरे होते हैं. हालाँकि, विभिन्न फ़ंड की विभिन्न जोख़िम प्रोफ़ाइल होती है, जिन्हें इसका उद्देश्य कहा जाता है. वे फ़ंड, जो स्वयं को निम्न जोख़िम के रूप में श्रेणीबद्ध करते हैं, आमतौर पर ऋण में निवेश करते हैं जो इक्विटी की अपेक्षा कम जोख़िम भरा होता है. चूँकि म्यूचुअल फ़ंड को विशेषज्ञ फ़ंड प्रबंधकों की सेवाओं तक पहुँच प्राप्त होती है, इसलिए वे शेयर बाज़ार में सीधे ही निवेश करने की तुलना में हमेशा सुरक्षित होते हैं.
म्यूचुअल फ़ंड में क्या जोख़िम हैं?
इक्विटी फ़ंड बाज़ार जोख़िम से भरे होते हैं अर्थात् इस बात की संभावना रहती है कि जिस फ़ंड में निवेश किया गया है उसके स्टॉक्स का मूल्य घट जाए. यह भी हो सकता है कि मूल्यों में वृद्धि हो जाए, जिससे फ़ंड की लाभ कमाने की संभावना होती है.
ऋण फ़ंड में दो मुख्य जोख़िम होते हैं - क्रेडिट जोख़िम और ब्याज दर जोख़िम. क्रेडिट जोख़िम का तात्पर्य इस बात की संभावना से है कि कंपनी, जिसने बॉण्ड या ऋणपत्र जारी किए हैं जिसमें फ़ंड का निवेश किया गया है, ब्याज या मूल भुगतान पर डिफ़ॉल्ट हो सकती है. ऋण फ़ंड प्रबंधक बेहतर क्रेडिट रेटिंग वाले बॉण्ड्स में निवेश करके इसका ध्यान रखते हैं.
ब्याज दर जोख़िम का तात्पर्य इस बात की संभावना से है कि बॉण्ड का मूल्य, जिसमें फ़ंड का निवेश किया गया है, अर्थव्यवस्था में आई ब्याज दरों में वृद्धि के कारण नीचे जा सकता है. आमतौर पर, यह याद रखना उपयोगी है कि यह ''उतार-चढ़ाव वाला संबंध'' है - ब्याज दरों में गिरावट आने पर बॉण्ड मूल्यों (और इसलिए, निवल परिसंपत्ति मूल्य) में उछाल आता है और ब्याज दरों में उछाल आने पर गिरावट आती है.
म्यूचुअल फ़ंड के लाभ क्या हैं?
आपका धन अनुभवी और योग्य पेशेवर लोगों द्वारा प्रबंधित किया जाता है
आपका निवेश अपने आप कई कंपनियों और उद्योगों में बँट जाता है, जिससे जोख़िम में कमी आती है
आपका धन बहुत अस्थायी है, विशेष रूप से असीमित अवधि वाले फ़ंड में
मध्यम से दीर्घावधि में उच्च रिटर्न प्रदान करने की संभावना किसी अन्य की अपेक्षा प्रतिभूतियों की व्यापक श्रेणी में बेहतर होती है
व्यक्तिगत प्रतिभूतियों में सीधे ही अनुसंधान और निवेश करने की लागत बड़े संग्रह और हज़ारों निवेशकों तक फैली होती है जिससे व्यक्तिगत शेयर कम हो जाता है
म्यूचुअल फ़ंड के परिचालन में उच्च पारदर्शिता होती है, जिससे आप अधिक जानकारी के आधार पर निवेश के निर्णय ले सकें
आपके पास आपकी आवश्यकताओं के अनुसार योजनाओं का विकल्प होता है
उद्योग निवेशक सुरक्षा के लिए बनाए गए कई उपायों के साथ नियंत्रित होता है
क्या म्यूचुअल फ़ंड रिटर्न का आश्वासन देते हैं?
कुछ म्यूचुअल फ़ंड में अस्थायी "आश्वासित" रिटर्न योजनाएँ होती हैं जो निश्चित वार्षिक रिटर्न की गारंटी देती हैं. वर्तमान में, बहुत ही कम फ़ंड हैं जो रिटर्न का आश्वासन देते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि अस्थिर बाज़ार में रिटर्न का आश्वासन देना संभव नहीं है.
आप किसी म्यूचुअल फ़ंड से धन कैसे अर्जित कर सकते हैं?
तीन तरीके हैं जिनके द्वारा आप म्यूचुअल फ़ंड से धन अर्जित कर सकते हैं
सबसे पहले आप म्यूचुअल फ़ंड से लाभांश प्राप्त कर सकते हैं. अधिकांश ऋण फ़ंड उनके लाभांश विकल्प में छह महीनों में एक बार लाभांश घोषित करते हैं. यदि आप लाभांश नहीं चाहते, तो आप संचयी विकल्प चुन सकते हैं. लाभांश घोषित होने पर, निवल परिसंपत्ति मूल्य में गिरावट आएगी, क्योंकि लाभांश का भुगतान इकाई के मूल्य में वृद्धि में से किया जाता है
इसके बाद, आप म्यूचुअल फ़ंड इकाइयों को उनके ख़रीदे गए मूल्य से अधिक पर बेचकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं. यह पूँजीगत लाभ है. (यदि आप इकाइयाँ कम मूल्य पर बेचते हैं, तो आपको पूँजी की हानि होगी.)
अंत में, आपकी इकाइयों के मूल्य में वृद्धि हो सकती है. यह अप्राप्त पूँजीगत लाभ है. लाभांश और पूँजीगत लाभ अलग-अलग माने जाते हैं
म्यूचुअल फ़ंड इकाइयों में निवेश करने के क्या लाभ क्या हैं?
ईएलएसएस (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स) के तहत 10,000/- रु. तक के योगदान पर 20% छूट
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म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करने के कर लाभ
इस दस्तावेज़ के अद्यतन होने के दिनांक से कर नियमों के मान्य होने पर, योजना या योजनाओं की इकाइयों में निवेश करने के लिए निवेशकों को मिलने वाले कर लाभ नीचे दिए गए हैं.
इस दस्तावेज़ में वर्णित कर लाभ वर्तमान कर नियमों के तहत और संबंधित स्थितियों के अधीन उपलब्ध होते हैं. दी गई जानकारी केवल सामान्य उद्देश्य के लिए शामिल की जाती है और भारत में मान्य वर्तमान क़ानून और व्यवहार से संबंधित एएमसी द्वारा प्राप्त सलाह पर आधारित होती है और निवेशक/निवेशकों को सचेत रहना चाहिए कि संबंधित वित्तीय नियमों या उनकी व्याख्या में बदलाव आ सकता है. चूँकि ऐसा किसी भी निवेश के साथ हो सकता है, इसलिए इस बात की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती कि योजना में निवेश के समय कर स्थिति या प्रस्तावित कर स्थिति हमेशा बनी रहेगी. कर परिणामों की व्यक्तिगत प्रकृति को देखते हुए, प्रत्येक निवेशक को अपने पेशेवर कर सलाहकार से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है.
सीमित अवधि वाले फ़ंड में निर्दिष्ट परिपक्वता अवधि होती है जिसकी सीमा 3 से 15 वर्ष होती है. फ़ंड निर्दिष्ट अवधि के दौरान ही ग्राहकी के लिए खुला होता है. प्रारंभिक सार्वजनिक ईश्यू के समय निवेशक योजना में निवेश कर सकते हैं और उसके बाद वे सूचीबद्ध स्टॉक एक्सचेंज पर योजना की इकाइयाँ ख़रीद या बेच सकते हैं.
म्यूचुअल फ़ंड की संपूर्ण आय में आय कर अधिनियम, 1961 ("अधिनियम") की धारा 10(23डी) के प्रावधान में आय कर से छूट होगी
अधिनियम की धारा 196(iv) के प्रावधान के तहत म्यूचुअल फ़ंड स्रोत पर बिना किसी कर कटौती के सभी आय प्राप्त करेगा. हालाँकि, म्यूचुअल फ़ंड द्वारा किए गए आय वितरण पर, यदि हो, तो आय कर 1 अप्रैल, 2003 या इसके बाद की योजनाओं के तहत घोषित लाभांशों पर अधिनियम की धारा 115R के तहत 12.5% (और साथ में समय-समय पर लागू अतिरिक्त अधिभार) देय होगा
हालाँकि, ये प्रावधान 1 अप्रैल, 2003 से प्रारंभ असीमित अवधि वाले इक्विटी ओरिएंटेड फ़ंड (जहाँ म्यूचुअल फ़ंड की कुल प्राप्तियों में 50 प्रतिशत से अधिक प्राप्तियाँ अधिनियम की धारा 115T में निर्धारित घरेलू कंपनियों के इक्विटी शेयरों में निवेश की जाती हैं) द्वारा वितरित किसी भी आय पर लागू नहीं होंगे
निम्न सारांश योजनाओं के स्थानीय निवेशकों पर लागू कर के तात्पर्य को रेखांकित करता है और अधिनियम 1961, संपत्ति-कर अधिनियम, 1957 और उपहार कर अधिनियम, 1958 (जिन्हें समग्र रूप से 'संबंधित प्रावधान' कहा जाता है), परिणामस्वरूप वित्त अधिनियम 2003 द्वारा किए गए सुधारों पर आधारित होता है:
पूँजीगत लाभ के अलावा आय
अधिनियम की धारा 10(35) के प्रावधान के अनुसार, अधिनियम की धारा 10(23D) के तहत निर्दिष्ट म्यूचुअल फ़ंड की इकाइयों के संदर्भ में प्राप्त आय प्राप्तकर्ता निवेशकों के लिए आय कर से मुक्त होती है.
स्रोत पर कर कटौती
निवेशकों के लिए आय की छूट की दृष्टिकोण से, अधिनियम की धारा 194के के प्रावधानों के तहत, म्यूचुअल फ़ंड द्वारा आय वितरण पर, कोई आय कर स्रोत पर कटौती योग्य नहीं होती.
पूँजीगत लाभ
अधिनियम की धारा 2(42ए) के अनुसार, पूँजी आस्ति के रूप में धारित योजना की इकाइयाँ स्थानांतरण दिनांक के ठीक पहले 12 महीनों से अधिक की अवधि के लिए पूँजीगत लाभों के परिकलन हेतु दीर्घावधि पूँजी आस्ति के रूप में मानी जाएँगी; अन्य सभी स्थितियों में, ये अल्पावधि पूँजी आस्ति के रूप में मानी जाएँगी.
इसके अतिरिक्त, अधिनियम की धारा 94 की उप-धारा (7) बताती है कि ऐसी इकाइयाँ, जो अभिलेख दिनांक के पहले 3 महीनों तक ख़रीदी गईं और इस दिनांक के बाद 3 महीनों में बेची गई हैं, उनके विक्रय/स्थानांतरण (मोचन सहित) से होने वाली कोई भी हानि, निवेशकों द्वारा कर छूट के रूप में दावा की गईं ऐसी इकाइयों पर (मोचन के अतिरिक्त) आय वितरण की सीमा को परिचालित करने के लिए उपलब्ध नहीं होगी.
योजना की इकाइयों के स्थानांतरण से स्थानीय निवेशकों को होने वाले दीर्घावधि और अल्पावधि पूँजीगत लाभ पर निम्न दरों के अनुसार कर आरोपित किया जाएगा:
कर की दर
आय की प्रकृति
कर की दर*
अल्पावधि पूँजीगत लाभ
स्थानीय निवासियों की स्थिति में बताए गए स्लैब्स के अनुसार उपयुक्त दर और कॉर्पोरेट निवासी की स्थिति में 35 प्रतिशत दर
दीर्घावधि पूँजीगत लाभ
लागत मुद्रास्फीति सूचकांक लाभ के साथ 20 प्रतिशत या लागत मुद्रास्फीति सूचकांक लाभ के बिना 10 प्रतिशत, जो भी कम हो
*साथ ही अधिभार जो भी लागू हो (नोट 1 देखें)
स्रोत पर कर कटौती
इकाइयों की पुनर्ख़रीद या मोचन से होने वाले पूँजीगत लाभ से स्रोत पर कर कटौती की आवश्यकता नहीं होती.
संपत्ति-कर के लाभ
योजनाओं के तहत धारित इकाइयाँ संपत्ति कर अधिनियम, 1957 की धारा 2(ईए) के तहत आस्तियाँ नहीं मानी जाती हैं और इसलिए उन पर संपत्ति कर देय नहीं होता.
उपहार कर
उपहार-कर अधिनियम, 1958, के आने से 1 अक्टूबर 1998 या इसके बाद से उपहारों के लिए आवेदन में रोक लग गई है. इसलिए योजनाओं के तहत ख़रीदी गईं उपहार इकाइयाँ उपहार-कर से मुक्त होंगी
धार्मिक और पारमार्थिक न्यास
म्यूचुअल फ़ंड की इकाइयों में निवेशों को धार्मिक और पारमार्थिक न्यासों के लिए आय कर अधिनियम 1962 के नियम 17सी के सहपठित अधिनियम की धारा 11(5) के तहत निवेश के योग्य प्रपत्र के रूप में माना जाएगा
नोट 1:अधिभार निम्नानुसार भारित होता है
आय की प्रकृति
कर की दर*
स्थानीय निवासी जिनकी कर योग्य आय 8,50,000 प्रति वर्ष तक हो
शून्य
स्थानीय निवासी जिनकी कर योग्य आय 8,50,000 प्रति वर्ष से अधिक हो
निम्न सारांश आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम'), संपत्ति कर अधिनियम, 1957 और उपहार कर अधिनियम, 1958 (जिन्हें समग्र रूप से 'संबंधित प्रावधान' कहा जाता है), इसके बाद वित्त अधिनियम 2003 द्वारा किए गए सुधारों के आधार पर, अनिवासी भारतीयों (‘एनआरआई')/ भारतीय मूल के व्यक्ति (‘पीआईओ') / विदेशी संस्थागत निवेशक (‘एफ़आईआई') पर लागू मुख्य कर का आशय रेखांकित करता है.
पूँजीगत लाभ के अलावा आय
अधिनियम की धारा 10(35) के प्रावधानों के अनुसार, अधिनियम की धारा 10(23डी) के तहत निर्दिष्ट म्यूचुअल फ़ंड की इकाइयों के संदर्भ में प्राप्त कोई भी आय प्राप्तकर्ता निवेशकों के लिए आय कर से मुक्त होती है.
पूँजीगत लाभ
अधिनियम की धारा 2(42ए) के अनुसार, पूँजी आस्ति के रूप में धारित योजना की इकाइयाँ स्थानांतरण दिनांक के ठीक पहले 12 महीनों से अधिक की अवधि के लिए पूँजी प्राप्तियों के परिकलन हेतु दीर्घावधि पूँजी आस्ति के रूप में मानी जाएँगी; अन्य सभी स्थितियों में, ये अल्पावधि पूँजी आस्ति के रूप में मानी जाएँगी.
इसके अतिरिक्त, अधिनियम की धारा 94 की उप-धारा (7) बताती है कि ऐसी इकाइयाँ, जो अभिलेख दिनांक के पूर्व 3 महीनों में ख़रीदी गईं और इस दिनांक के बाद 3 महीनों में बेची गई हैं, उनके विक्रय/स्थानांतरण (मोचन सहित) से होने वाली कोई भी हानि निवेशकों द्वारा कर छूट के रूप में दावा की गईं ऐसी इकाइयों पर (मोचन के अतिरिक्त) आय वितरण की सीमा को स्पष्ट करने के लिए उपलब्ध नहीं होंगी.
विदेशी संस्थागत निवेशक
इकाइयों के विक्रय पर दीर्घावधि पूँजीगत लाभ पर अधिनियम की धारा 115एडी के तहत 10% की दर से कर लगाया जाएगा. ऐसे लाभ अभिग्रहण लागत की सूचीकरण के बिना परिकलित किए जाएँगे. अल्पावधि पूँजीगत लाभ पर 30% की दर से कर लगाया जाएगा. बताई गईं दरें लागू कर अनुबंध राहत के अधीन होंगी. उपर्युक्त कर दरों में उपयुक्त अधिभार के आधार पर वृद्धि होगी.
अधिनियम की धारा 196डी (2) के प्रावधानों के संदर्भ में इकाइयों की पुनर्ख़रीद/मोचन पर विदेशी संस्थागत निवेशकों को होने वाले पूँजीगत लाभ (दीर्घावधि या अल्पावधि) से स्रोत पर कर में कोई कटौती नहीं की जाएगी.
अनिवासी भारतीय/भारतीय मूल के व्यक्ति
योजना इकाइयों के स्थानांतरण से अनिवासी भारतीयों/भारतीय मूल के व्यक्तियों को होने वाले दीर्घावधि और अल्पावधि पूँजीगत लाभों पर निम्न दरों पर कर लगाया जाएगा:
आय की प्रकृति
कर की दर*
अल्पावधि पूँजीगत लाभ
अनिवासी भारतीयों/भारतीय मूल के व्यक्तियों की स्थिति में अनुशंसित स्तर के अनुसार लागू दर
दीर्घावधि पूँजीगत लाभ
लागत मुद्रास्फीति सूचकांक लाभ के साथ 20 प्रतिशत या लागत मुद्रास्फीति सूचकांक लाभ के बिना 10 प्रतिशत, जो भी कम हो
* साथ ही अधिभार जो भी लागू हो (नोट 2 देखें).
स्रोत पर कर कटौती
इकाइयों की पुनर्ख़रीद या मोचन से होने वाले पूँजीगत लाभ से स्रोत पर कर कटौती की आवश्यकता नहीं होती.
अल्पावधि पूँजीगत लाभ
अधिनियम की धारा 195 के प्रावधानों के अनुसार, यदि आदाता अनिवासी भारतीय/भारतीय मूल का व्यक्ति है, तो स्रोत पर 30 प्रतिशत की दर से कर कटौती की आवश्यकता होगी.
दीर्घावधि पूँजीगत लाभ
अनिवासी भारतीय/भारतीय मूल के व्यक्तियों की स्थिति में अधिनियम की धारा 195 के तहत 20 प्रतिशत की दर से कर कटौती होगी.
* साथ ही अधिभार जो भी लागू हो
संपत्ति-कर के लाभ
योजनाओं के तहत आने वाली इकाइयाँ संपत्ति कर अधिनियम, 1957 की धारा 2(ईए) के तहत आस्तियाँ नहीं मानी जाती हैं और इसलिए संपत्ति कर देय नहीं होता.
उपहार कर
उपहार कर अधिनियम, 1958, के आने से 1 अक्टूबर 1998 या इसके बाद से उपहारों के लिए आवेदन करने पर रोक लग गई है. इसलिए योजनाओं के तहत ख़रीदी गईं उपहार इकाइयाँ उपहार कर से मुक्त होंगी
नोट 1: अधिभार निम्नानुसार भारित होता है
कर निर्धारिती
लागू अधिभार दर
अनिवासी भारतीय/ भारतीय मूल के व्यक्ति/ गै़र-कॉर्पोरेट विदेशी संस्थागत निवेशक जहाँ कर योग्य आय 850,000 रु. तक प्रति वर्ष होती है
शून्य
अनिवासी भारतीय/ भारतीय मूल के व्यक्ति/ गै़र-कॉर्पोरेट विदेशी संस्थागत निवेशक जहाँ कर योग्य आय 850,000 रु. प्रति वर्ष से अधिक होती है
यदि संपूर्ण पूँजीगत लाभों को भारतीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या ग्रामीण विद्युतीकरण निगम मर्यादित द्वारा जारी 3 वर्ष के बाद मोचनयोग्य बॉण्ड्स में स्थानांतरण दिनांक के छह महीनों में निवेश किया हुआ माना जाता है, तो इकाइयों के स्थानांतरण पर दीर्घावधि पूँजीगत लाभ अधिनियम की धारा 54ईसी के तहत कर मुक्त होंगे. हालाँकि, यदि बॉण्ड्स में निवेश की गई राशि पूँजीगत लाभ से कम है, तो केवल पूँजीगत लाभ के अनुपात में ही कर छूट मिलेगी. यदि इस प्रकार प्राप्त बॉण्ड्स बेचे जाते हैं या अन्यथा तीन वर्षों में स्थानांतरित किए जाते हैं, तो कर मुक्त राशि कर योग्य मानी जाएगी.
यदि संपूर्ण पूँजीगत लाभ को भारत में बनी और पंजीकृत कंपनी के इक्विटी शेयर के सार्वजनिक ईश्यू में स्थानांतरण दिनांक के छह महीनों में निवेश किया हुआ माना जाता है, तो इकाइयों के स्थानांतरण पर दीर्घावधि पूँजीगत लाभ अधिनियम की धारा 54ईडी के तहत कर मुक्त होंगे. हालाँकि, यदि सार्वजनिक ईश्यू में निवेश की गई राशि पूँजीगत लाभ से कम है, तो केवल पूँजीगत लाभ के अनुपात में ही कर में छूट मिलेगी. यदि इस प्रकार प्राप्त इक्विटी शेयर बेचे जाते हैं या अन्यथा एक वर्ष में स्थानांतरित किए जाते हैं, तो कर मुक्त राशि कर योग्य मानी जाएगी.
1 अप्रैल, 2001 से प्रभावी, यदि प्रतिभूतियाँ या इकाइयाँ अभिलेख दिनांक के 3 महीने पहले ख़रीदी गईं और ऐसे दिनांक के 3 महीने बाद बेची गई हैं, तो ऐसी प्रतिभूतियों या इकाइयों (जिसके संदर्भ में ऐसी प्रतिभूतियों या इकाइयों पर लाभांश या आय कर मुक्त होते हैं) के विक्रय से होने वाली हानियों को आय कर अधिनियम, 1961, की धारा 94(7) के तहत अस्वीकृत माना जाएगा. अस्वीकृत हानि की राशि करदाता द्वारा कर मुक्त के रूप में दावा की गई प्रतिभूतियों या इकाइयों पर लाभांश या आय की राशि के लिए प्रतिबंधित होगी.
म्यूचुअल फ़ंड में किसे निवेश करना चाहिए?
म्यूचुअल फ़ंड लगभग सभी प्रकार के निवेशकों के निवेश उद्देश्यों को पूरा कर सकते हैं. छोटे निवेशक जो दीर्घावधि में ठोस पूँजी वृद्धि को लक्ष्य बनाकर कुछ जोख़िम ले सकते हैं उनके लिए वृद्धि योजनाएँ (अर्थात् स्टॉक्स में निवेश किए जाने वाले फ़ंड) श्रेष्ठ विकल्प होगा.
पुराने निवेशक जो जोख़िम नहीं लेना चाहते और मध्यम अवधि में स्थिर आय चाहते हैं वे आय योजनाओं (अर्थात् ऋण लिखतों में निवेश किए जाने वाले फ़ंड) में निवेश कर सकते हैं. मध्यम आयु के निवेशक उनकी बचत को आय फ़ंड और वृद्धि फ़ंड के बीच बाँट सकते हैं और आय एवं पूँजी वृद्धि दोनों प्राप्त कर सकते हैं. ऐसे निवेशक जो नियमित बचत चाहते हैं, हर माह कुछ धन बचाना चाहते हैं, वे सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान का उपयोग कर सकते हैं
चूँकि म्यूचुअल फ़ंड योजनाओं का केवल शेयर बाज़ार में ही निवेश किया जाता है, तो क्या वे छोटे निवेशकों के लिए उचित हैं?
म्यूचुअल फ़ंड का अर्थ छोटे निवेशकों से है. मुख्य कारण यह है कि शेयर बाज़ार में सफल निवेश के लिए सावधानीपूर्वक विश्लेषण की आवश्यकता होती है जो छोटे निवेशकों के लिए संभव नहीं है. म्यूचुअल फ़ंड आमतौर पर विश्लेषण सहित होते हैं और बेहतर रिटर्न दे सकते हैं